देहरादून: बेटी के साथ यौन उत्पीड़न के दोषी एयरफोर्स कर्मचारी को 20 साल की सजा | पॉक्सो कोर्ट का फैसला

देहरादून पॉक्सो कोर्ट का फैसला, नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में न्याय का प्रतीक

"यह सांकेतिक/प्रतीकात्मक तस्वीर है"।

देहरादून में अमानवीय अपराध, अदालत ने कहा – दोषी पर किसी भी तरह की नरमी नहीं

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सामने आए एक गंभीर और संवेदनशील मामले में पॉक्सो अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ वर्षों तक यौन उत्पीड़न करने के दोषी एक एयरफोर्स कर्मचारी को अदालत ने 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया गया है और पीड़िता को ₹3 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।


कम उम्र से लगातार होता रहा यौन शोषण

अदालत में सामने आए तथ्यों और गवाहियों के अनुसार, आरोपी तब से बच्ची के साथ आपराधिक कृत्य करता आ रहा था जब वह बहुत कम उम्र की थी। आरोपी बच्ची को लगातार मानसिक दबाव में रखता था ताकि वह किसी को इस बारे में कुछ न बता सके।


डराने के लिए तोड़ देता था खिलौने

पीड़िता ने अदालत को बताया कि आरोपी उसे डराने और चुप कराने के लिए उसके खिलौनों को नुकसान पहुंचाता था और धमकी देता था कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो परिणाम ठीक नहीं होंगे।

आरोपी बच्ची को भ्रमित करते हुए यह भी कहता था कि यह सब सामान्य है और किसी को बताने की जरूरत नहीं है।


बड़ी होने पर पीड़िता ने दिखाई हिम्मत

समय के साथ जब पीड़िता बड़ी हुई तो उसने इस अन्याय का विरोध किया और अंततः अपनी मां को पूरी सच्चाई बता दी। इसके बाद परिवार ने कानूनी कदम उठाने का फैसला किया।


नवंबर 2023 में दर्ज हुई शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता की मां ने नवंबर 2023 में रायपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने की जानकारी मिलते ही आरोपी फरार हो गया, हालांकि पुलिस ने बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय में पेश किया।


कोर्ट की अहम टिप्पणी

> “जिस पिता की जिम्मेदारी अपनी बेटी को सुरक्षित वातावरण देना और उसकी रक्षा करना थी, उसी ने उसके भरोसे को तोड़ा और उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति को गंभीर नुकसान पहुंचाया। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।”

सजा और मुआवजा
दोषी को 20 साल की कठोर कारावास
₹25,000 का आर्थिक जुर्माना
पीड़िता को ₹3 लाख रुपये मुआवजा


निष्कर्ष

यह फैसला समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कानून पूरी सख्ती से कार्रवाई करता है। अदालत का यह निर्णय पीड़ितों को न्याय दिलाने और ऐसे अपराधों को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







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