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अगर उस दिन कौवा न बोलता, तो आज घुघुतिया नाम का त्योहार नहीं होता जाने विस्तार से

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इस बार 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा यह त्यौहार  "यह सांकेतिक/प्रतीकात्मक तस्वीर" है| घुघुतिया त्यौहार कब और क्यों मनाया जाता है? Uttarakhand | उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में ही सिर्फ़ ये त्योहार मनाया जाता है। और यह बहुत प्रसिद्ध त्योहार है। हर साल यह त्यौहार मकर संक्रांति के दिन मनाया जाता है। उत्तराखंड के पहाड़ी लोग इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाते है। घुघुते क्या होते हैं और कैसे बनाए जाते हैं? जिसमें पहले दिन मीठे आटे से यानि (गेहूं के आटे में गुड़ या चीनी डालकर) तरह तरह आकर में आटे की लोई को शेप दिया जाता है। और फिर तेल में फ्राई किया जाता है। इस पकवान को पहाड़ी भाषा में  घुघुत, ढाल, तलवार, दाड़िम का फूल, डमरू, खजूर इत्यादि कहा जाता है। ये पकवान अलग–अलग शेप में बनते है। और फिर इसे धागे में डालकर एक माला का आकार दिया जाता है। तथा उसके अगले दिन सुबह बच्चे इस माला को गले में डालकर कौवे को बुलाते है। इस पकवान को खिलाने के लिए। ये त्योहार वर्षों से चला आ रहा है। जो कि पूरे धूमधाम से मनाया जाता हैं। घुघुतिया से जुड़ी लोककथाएँ और ऐतिहासिक मान्यताएँ हमारे पहाड़ में घुघुतिया का ...

उत्तरायणी मेला Bageshwar 2026: 13 se 17 January tak bhavya ayojan

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"यह सांकेतिक/प्रतीकात्मक तस्वीर है"। बागेश्वर: हर साल की भांति इस साल भी उत्तरायणी मेले का भव्य आयोजन होगा। मेले की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है। इस बार मेले में रिकॉर्ड अधिक भक्तों के आने का अनुमान है। सरयू घाट बागनाथ मंदिर पर यह मेला 13 जनवरी से  नुमाइशखेत के मैदान में शुरू होगा और मेले का समापन 17 जनवरी को होगा। उत्तरायणी मेला हर साल जनवरी महीने में मकर संक्रांति के दिन से शुरू होता है। यह मेला काफी प्रसिद्ध है। इन मेले में पूरे प्रदेश भर के लोग आते है। बाबा बागनाथ से आशीर्वाद लेने के लिए अपने पूरे परिवार के साथ मत्था टेकने के लिए। यह मेला पहाड़ की सांस्कृतिक छवि को तो दर्शाता ही है साथ ही व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह मेला स्थानीय लोगों को तो रोजगार देता ही है साथ साथ में कई जगहों से लोग यहां व्यापार करने आते है। यह तरह तरह की छोटी दुकानें लगती है। झूले लगते है और मनमोहक कार्यक्रम भी होते है। जिसमें स्थानीय कलाकार, स्कूल के बच्चे और बाहर से भी टीमें आती है। जो अपनी प्रस्तुति से मन मोह लेते है। मकर संक्रांति के दिन यहां जनेऊ संस्कार भी बड़ी संख्या में होते है। शुभ...